साया बन के चलूँगी संग आपके

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

साया बन के चलूँगी संग आपके,

ससुर संग ना रहूं ना रहूं बाप के....

अयोध्या के महल हमे भाते नहीं,

ये सोने के सिंहासन सुहाते नहीं,

मैं तो पत्थर पे बैठूं संग आपके,

ससुर संग ना रहूं न रहूं बाप के.....

महलों के खाने हमें भाते नहीं,

पूड़ी और हलुआ सुहाते नहीं,

कंदमूल खाके रहूं संग आपके,

ससुर संग ना रहूं न रहूं बाप के.....

ये सोने और चांदी हमे भाते नहीं,

ये तकिए और गद्दे सुहाते नहीं,

मैं तो पत्तों पे सोई संग आपके,

ससुर संग ना रहूं न रहूं बाप के.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।