नहीं जानते हम तुमको मनाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज:- तुम्हीं मेरे मन्दिर तुम्हीं मेरी पुजा

नहीं जानते हम तुमको मनाना,

हमसे कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

लायक नहीं हूँ मैं जानता हूँ,

अपने गुनाहों को पहचानता हूँ,

अपना समझ सारी खता भुलाना,

हमसे कभी तुम रूठ ना जाना,

हमसें कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

ये पूजन अर्चन ये वंदन ना आए,

कहो श्याम प्यारे तुमको कैसे मनाए,

प्रेम किया है तुमसे प्रेम निभाना,

हमसें कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

अगर जो ना होता भरोसा तुम्हारा,

दुनिया में कैसे होता गुजारा,

किरपा की छैया कभी ना हटाना,

हमसें कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

बिन तेरे प्यारे रह नहीं सकता,

दर्द जुदाई का सह नहीं सकता,

अपने ‘सुनील’ को कभी ना भुलाना,

हमसे कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

नहीं जानते हम तुमको मनाना,

हमसे कन्हैया रूठ ना जाना,

नहीं जानते हम तुमको मनाना।।

गायक – कुमार गिरिराज जी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।