ना ठोकर मारो मैया जी मैं दुनिया की सताई हूं

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ना ठोकर मारो मैया जी मैं दुनिया की सताई हूं,

मैं दुनिया की सताई हूं तेरे दरबार आई हूं,

मैं दासी हूं तेरे दर की तेरे चरणों में आई हूं,

ना ठोकर मारो मैया जी.....

पहाड़ों पर तेरा मंदिर कठिन उसकी चढ़ाई है,

ना घोड़ा है ना गाड़ी है मैं पैदल चल कर आई हूं,

ना ठोकर मारो मैया जी.....

दिए अपनो ने धोखे मां यह दुनिया पैसे वालों की,

ना रुपया है ना पैसा है मैं खाली हाथ आई हूं,

ना ठोकर मारो मैया जी....

पड़ी नैया भंवर में मां किनारा दूर है मेरा,

खिवैया आप बन जाओ तो बेड़ा पार हो जाए,

ना ठोकर मारो मैया जी.....

मुझे अपना बना लो माया इस जग से उठा लो मां,

तुम्हें पाने की चाहत में मैं दुनिया छोड़ आई हूं,

ना ठोकर मारो मैया जी.....

तेरी एक झलक पाने को यह अखियां जल भर लाई है,

ना तड़पाओ मुझे मैया में दर्शन करने आई हूं,

ना ठोकर मारो मैया जी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।