पंखिड़ा ओ उड़ न जाना पावा गढ़ रे

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पँखिडा ओ पँखिडा पँखिडा ओ पँखिडा॥

पँखिडा तु उड़ ने जाना पावागढ़ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे।

म्हारी महाकाली से जईने कीजो गरबो रमे रे॥॥

म्हारा गाँव का सुतार भाई बेगा आवो रे,

म्हारी महाकाली केलिये सुंदर बाजोट लाओ रे,

अच्छा लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे॥॥

म्हारा गाँव का बजाज भाई जल्दी आवो रे,

म्हारी महाकाली के लिये सुंदर चुँदडी लाओ रे,

अच्छी लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे॥॥

म्हारा गाँव का लीलहार भाई बेगा आवो रे,

म्हारी महाकाली केलिये सुंदर चुड़िया लाओ रे,

अच्छी लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे॥॥

म्हारा गाँव का सुनार भाई जल्दी आवो रे,

म्हारी महाकाली के लिये सुंदर पायल लाओ रे,

अच्छी लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे॥॥

म्हारा गाँव का कुम्हार भाई बेगा आवो रे,

म्हारी महाकाली के लिये सुंदर गरबा लाओ रे,

अच्छा लाओ सुंदर लाओ जल्दी आओ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे॥॥

पँखिडा ओ पँखिडा पँखिडा ओ पँखिडा॥

पँखिडा तु उड़ ने जाना पावागढ़ रे,

महाकाली से मिलके कहना गरबा खेलेंगे।

म्हारी महाकाली से जईने कीजो गरबो रमे रे॥॥

" मंजीत सिंह "

पैड प्लेयर=9887203444

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।