मिलने को मैया दिल तरसे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

भवन में रस बरसे रस बरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

मैया जी मेरे नैन हुए बेकार,

दर्शन करने को मन तरसे दिल तरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

भगत तोहै नैना अनमोल,

दर्शन तो करो दिल भर के मन भर के रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

मैया जी मेरे कान हुए बेकार,

सत्संग सुनने को मन तरसे दिल तरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

भगत तोहै कांदा अनमोल,

सत्संग तो सुनो मन भर कर दिल भर कर रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

मैया जी मेरा कंठ हुआ बेकार,

भेटे गाने को मन तरसे दिल तरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

भगत तो है कंठ दउ अनमोल,

भेटे तो गाऊ दिल भर के मन भर के रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

मैया जी मेरे हाथ हुए बेकार,

दान करने को मन तरसे दिल तरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

भगत तो है हाथ दऊ अनमोल,

दान करो मन भर के दिल भर कर रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

मैया जी मेरे पैर हुए बेकार,

तीरथ करने को मन तरसे दिल तरसे रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

भगत तो है पैर दऊ अनमोल,

तीरथ तो करो मन भर के दिल भर के रे,

मिलने को मैया दिल तरसे दिल तरसे रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।