करके प्रीत पछताई रे बेदर्दी सांवरिया से

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

करके प्रीत पछताई रे बेदर्दी सांवरिया से,

दरदी पिया से बेदर्दी पिया से....

बरसो की कहे अब ही ना आए,

मेरे दिल को बहुत दुखाए,

काहे रूठा है मेरा कनाही रे बेदर्दी सांवरिया से.....

लिख लिख बात मेंने बहुत बनाई

बेदर्दी को शरम ना आई

और कुब्जा से प्रीत लगाई रे बेदर्दी सांवरिया से.....

अपनी थान जाने एक ना मानी,

बेदर्दी ने कदर ना जानी,

तूने प्रीत की रीत ना निभाई रे बेदर्दी सांवरिया से....

जो ऐसा जानती तो चकर मे ना पढती,

सांवरे छलिया से प्रीत नही करती,

तू तो निकला हरजायी रे बेदर्दी सांवरिया से....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।