मेरे सद्गुरुजी को लाख बार वंदना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन गुरुदेव भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बार बार वंदना हजार बार वंदना,

मेरे सद्गुरुजी को लाख बार वंदना....

मीरा जैसी प्रीति हमे देना, शबरी जैसी भक्ति हमे देना,

मीरा के श्याम को बार बार वंदना,

शबरी के राम को हजार बार वंदना,

बार बार....

रिस्तो की चौखट पे ठोकर है खाई,

जब सब लुटा तो तेरी याद आई,

सच्चा जो तेरा सहारा नही मिलता,

ये जीवन हमारा दुबारा नहीं खिलता,

बार बार.....

उद्धव जैसा ज्ञान हमे देना,

केवट जैसा काम हमे देना,

उद्धव के श्याम को बार बार वंदना,

केवट के राम को हजार बार वंदना,

बार बार.....

नरसिंह जैसी श्रद्धा हमे देना,

जल्याण जैसी शक्ति हमे देना,

नरसिंह के श्याम को बार बार वंदना,

जल्याण के राम को हजार बार वंदना,

बार बार...

प्रेषक गायक . ललित भट्ट द्वारका

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।