चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में,

रत्नागढ़ से आ गई मैया हम भक्तों के प्यार में,

चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार मे....

भाई किर्सान्यो करे चाकरी मैया के दरबार में,

अन्नपूर्णा से आ गई मैया किर्सान्या के प्यार में,

चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में....

भाई झमराल्यो करे चाकरी मैया के दरबार में,

सलकनपुर से आ गई मैया झमराल्या के प्यार में,

चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में....

भाई सुनार्यो करे चाकरी मैया के दरबार में,

पावागङ से आ गई मैया सुनार्या के प्यार में,

चांद जैसा मुखड़ा मां का बैठी है दरबार में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।