बैठ नजदीक तूं सांवरे के

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये है भूखा तेरी भावना का,

ये है प्यासा तेरे प्रेम रस का,

नंगे पैरो ही दौड़ा ये आए,

प्रेमियों का इसे ऐसा चस्का,

प्रेम जितना तू इनसे बढाए,

उतना तेरी तरफ ये बढ़ेगा,

देख नज़रों से नजरे मिला के,

तुमसे बाते वो करने लगेगा,

बैठ नज़दीक तू साँवरे के,

तार से तार जुड़ने लगेगा....

पास में बैठ कर तुम प्रभु को,

अपने दिल की हकीकत सुनाओं,

एक टक तुम छवि को निहारो,

कोई प्यारी सी धुन गुनगुनाओं,

भाव जागेंगे तेरे ह्रदय में,

प्रेम तेरा उमड़ने लगेगा,

देख नजरो से नजरे मिला के,

तुमसे बाते वो करने लगेगा,

बैठ नज़दीक तू साँवरे के,

तार से तार जुड़ने लगेगा....

श्याम से प्यार जिसने किया है,

स्वाद जीवन का उसने लिया है,

जिसने नजदीकियाँ है बढ़ाई,

उसने मस्ती का प्याला पिया है,

बिन्नू होठों पे रख के तो देखो,

सारा जीवन महकने लगेगा,

देख नजरो से नजरे मिला के,

तुमसे बाते वो करने लगेगा,

बैठ नज़दीक तू साँवरे के,

तार से तार जुड़ने लगेगा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।