मालिक तेरे जहांन में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मालिक तेरे जहां में,

इतनी बड़े जहां में,

कोई नहीं हमारा,

कोई नहीं हमारा,

मालिक तेरे जहां में,

अब किस की द्वार जाऊं,

दुःख में किसे बुलाऊं,

सब कर गए किनारा,

कोई नहीं हमारा,

मालिक तेरे जहां में....

इस हाल में भी देखो,

ठुकरा रही है दुनिया,

हम पर बनी तो हम से,

कतरा रही है दुनिया,

हम पर बनी तो हम से,

कतरा रही है दुनिया,

ना आस ना दिलासा,

सब तो है इक तमाशा,

झूठा है हर सहारा,

कोई नहीं हमारा,

मालिक तेरे जहां में.....

सर पे था छाया,

मुझ से बिछड़ गए है,

उम्मीद के वो मोती,

आंसू में ढल गए है,

उम्मीद के वो मोती,

आंसू में ढल गए है,

क्या रात क्या सवेरा,

हाथो पहर अधेरा,

टूटा हर एक तारा,

कोई नहीं हमारा,

मालिक तेरे जहां में,

इतनी बड़े जहां में,

कोई नहीं हमारा,

कोई नहीं हमारा,

मालिक तेरे जहां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।