चिता की भस्म रमा के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

चिता की भस्म रमाके,

श्रृंगार करने वाला,

कितना सुंदर लागे भोला,

कितना लागे प्यारा.....

शिश पे चंदा साजे,

जटा में गंग विराजे,

भक्त दिवाने होते हैं,

जब जब भोले का डमरू बाजे,

हे चंदा यह महादेव,

तारे हे जग ये सारा,

कितना सुंदर लागे भोला,

कितना लागे प्यारा....

बदन पे मृग की छाल,

तेरे गले में मुण्ड की माल,

हाथ कमण्डल साजे,

लाचार खड़ा हे काल,

हवा में सर सर करता,

तेरे गले में नाग है काला,

कितना सुंदर लागे भोला,

कितना लागे प्यारा....

नंदी पे सवारी करता,

भांग धतूरे पे मरता,

गोरा न घोंटे भांग तो,

भोले का मन है जलता,

निल कंठ है महादेव,

जग का है रखवाला,

कितना सुंदर लागे भोला,

कितना लागे प्यारा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।