कर किरपा तेरे गुण गावँ

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

कर किरपा तेरे गुण गावँ

कर किरपा तेरे गुण गावँ ....कर किरपा तेरे गुण गावँ

नानक नाम जपत सुख पावहं

नानक नाम जपत सुख पावहं ...कर किरपा तेरे गुण गावँ

तू वाध दाता अन्तरजामि

सभ में रवैया पुराण प्रभ स्वामी ...कर किरपा तेरे गुण गावँ

मेरे प्रभ प्रीतम नाम अधारा

होऊ सुनह सुनह जेवा नाम तुम्हारा ....कर किरपा तेरे गुण गावँ

तेरे शरण सतगुर मेरे पुरे

मन निर्मल होए संता धुरः .....कर किरपा तेरे गुण गावँ

चरण कमल हिरदेह औरः धरे

तेरे दर्शन को जिए बालहरे .....कर किरपा तेरे गुण गावँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।