जली है ज्योत ज्वाला की

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जगी है ज्योत ज्वाला की नज़ारा हम भी देखेंगे

नज़ारा भी देखेंगे नज़ारा तुम भी देखोंगे

मैया के गले का हरवा मैया के पेंडल से उलझा

यह उलझन कैसे सुलझेगी नज़ारा हम भी देखेंगे

जगी है......

मैया से माथे का टिका मैया की बिंदी से उलझा

यह उलझन कैसे सुलझेगी नज़ारा हम भी देखेंगे

जगी है.....

मैया के हाथो के कंगन मैया की मेहँदी से उलझे

यह उलझन कैसे सुलझेगी नज़ारा हम भी देखेंगे

जगी है......

मैया के पैरो की पायल मैया के बिछुओ से उलझे

यह उलझन कैसे सुलझेगी नज़ारा हम भी देखेंगे

जगी है.....

ज़रा जोर से बोलो जय माता दी

मैनु नी सुण्या जय माता दी

अगले भी बोलो जय माता दी

यह ज्वाला मैया जय माता दी

दर ते आयी जय माता दी

झोलिया भर लो जय माता दी

माँ वैष्णो जय माता दी

बारहए भंडारे जय माता दी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।