आँच तुम्हारे भक्तजनो पे आये क्यों

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शेरावाली माँ

लाटावाली माँ

ओ आँच तुम्हारे भक्त जनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

आँच तुम्हारे भक्त जनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

अम्बे रानी जय हो तेरी,

महा रानी जय हो तेरी,

देवा रानी जय हो तेरी,

जय हो तेरी जय हो...

तेरी दया से पत्थर भी तर जाते है,

एक ही पल में दुःख सभी हर जाते है,

शेरावाली माँ लाटावाली,

ओ जहाँ जलाये आशा की तू ज्योति माँ,

वहाँ के कंकर बन जाते है मोती माँ,

शेरावाली माँ लाटावाली,

हो तेरा पुजारी संकट में घबराये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

आँच तुम्हारे भक्तजनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों.......

सूखे में तू जल थल करने वाली माँ,

गागर में तू सागर भरने वाली माँ,

शेरावाली माँ लाटावाली,

हो जादू तेरा बोले है सिर चढ़ के माँ,

तू चाहे तो मुर्दो का दिल धड़के माँ,

शेरावाली माँ लाटावाली,

ओ नाम दीवानो को मोह माया भटकाये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

आँच तुम्हारे भक्तजनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों....

महाकाली जय हो तेरी,

भद्रकाली जय हो तेरी,

खंडे वाली जय हो तेरी,

जय हो तेरी जय हो,

जब भी बरसे तेरी दया का बादल माँ,

आग का दरिया हो जाता है शीतल माँ,

शेरावाली माँ लाटावाली,

ओ होनी को अनहोनी तुम ही करती हो,

संकटहरनी सबके संकट हरती हो,

शेरावाली माँ लाटावाली,

ओ फिर ये तेरा गंगा नीर बहाये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

आँच तुम्हारे भक्त जनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

आँच तुम्हारे भक्तजनो पे आये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों,

जिसपे तुम्हारा हाथ है वो दुःख पाये क्यों......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।