जन्म मोहे वृंदावन दीजो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कन्हैया ना चाहिए कछु और जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

जन्म मोहे वृंदावन दीजो जन्म बरसाने में दीजो,

कन्हैया ना चाहिए कछु और.....

पहले जन्म मोहे सरयू का दीजो,

अरे कान्हा जमुना दिजो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

दूजो जन्म मोहे पेड़ को दीजो,

अरे कान्हा तुलसा दियो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

तीजो जन्म पक्षी को दीजो,

अरे कान्हा मोरा दियो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

चौथा जन्म मोहे पशु को दीजो,

अरे कान्हा कपिला गाय दियो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

पांचवा जन्म झाडी को दीजो,

अरे कान्हा फुलवा दियो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

छठवां जन्म नारी का दीजो,

अरे कान्हा राधा दियो बनाए, जन्म मोहे वृंदावन दीजो,

अरे कान्हा ना चाहिए कछु.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।