रण में मारे किलकार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चली आवे जीभ निकाल हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

खप्पर खड़क सवारे मैया हो मैया,

और मुख से निकले आग हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

देख रूप दिगपाल डरे हे मैया,

और मच रही हाहाकार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

रूंड मुंड धरनी डारे है मैया,

और वहै खून की धार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

अब नहीं बचाए बचें राक्षस हो मैया,

और रक्तबीज गए हार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

रण में आगे बढ़ती जावे हे मैया,

और घूम रही तलवार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

मारत जा राक्षस बढ़ते जा हे मैया,

और करती जाए संघार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

देख रूप मैया काली को हे मैया,

थरथर कांपे है संसार हाथ में खड़क लिए खड़क लिए,

रण में मारे किलकार.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।