रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले,

तुम्हारे बिना कौन हम को संभाले.....

वीरान है जिंदगी ये हमारी,

मेरे सांवरे क्या ये रहमत तुम्हारी,

तुम्हारे हवाले है जीवन की डोरी,

मेरे सांवरे इसको आंके संभालो,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले.....

मुझे दर्द ही दर्द क्यों मिल रहे हैं,

रहे कैसे तुम बिन ये दासी तुम्हारी,

सिसक क्यों रही है ये जिंदगी हमारी,

मैं जैसी भी हूं मुझे कहीं तो निभा ले,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले.....

बिरहा की अग्नि में मैं जल रही हूं,

आकर कहीं से तू मुझको बचा ले,

तुम्हारे हवाले है नैया हमारी,

किनारे लगा दे या डुबकी लगा दे,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले.....

दुनिया तो कान्हा है केवल खिलौना,

इसे जैसे चाहे तू वैसे नचा ले,

आंखों के तेरे हम हैं खिलौने,

जैसे तू चाहे वैसे खिलाले,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले....

दाता एक तू सारी दुनिया भिखारी,

जीवन हे तेरा तेरे हवाले,

तू ही बिगड़े तू ही संभाले,

ओ बंसी वाले ओ मुरली वाले,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले....

भटकू कहां इस जहां में कन्हैया,

चरणों मैं अपने कहीं तो बिठाले,

जालिम जमाना जीने ना देगा,

कहती है दासी चरण चित लगा ले,

रुला क्यों रहे हो मुझे मुरली वाले....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।