अखा खोला ते वेखा संसार मालका

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

अखा खोला ते वेखा संसार मालका,

बंद करा ते तुहियो मेरे नाल मालका.....

चिट्टा चोला ते गल विच हार मालका,

सोहनी लगदे ने मैनु तेरी चाल मालका,

अखा खोला ते वेखा संसार मालका......

लोकी कहंदे ने गम ओथे भूल जांदे,

पावा दर्शन ते होवा मैं निहाल मालका,

अखा खोला ते वेखा संसार मालका.....

सारी दुनिया दा इको रिश्तेदार तुही है,

करदे किरपा ते हो जाये बेडा पार मालका,

अखा खोला ते वेखा संसार मालका.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।