अँखियाँ मेरी हरखी

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - तेरी झलक शर्फि

है चंदा की चांदनी जिसमे, सूरज का तेज समाये,

है प्यारी सी ये सूरत तेरी, भक्तों के मन को लुभाये

लगता हजारों में सबसे है प्यारा तू,

नेनो से नेंन मिलाकर, तुझको निहार लूँ,

तेरी मूरत निरखी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी,

देखी तेरी ये झांकी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी......

हो..नेनो के रास्ते, दिल मे तू आजा,

चुरू के राजा, दिल मे समाजा,

सब कुछ लुटादु मैं, तेरे ही आगे,

प्रीत की रीत बाबा, आके निभाजा,

नही चाहिए चांदी सोना, मांगू एक तेरे दर का कोना,

तेरी पनाह में आकर मेरी, जिंदगी संवर जाये,

तेरी मूरत निरखी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी,

देखी तेरी ये झांकी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी......

रूप सुहाना तेरा, नैना मतवारे,

भक्तो पे हरपल, जादू ये डारे,

सूरत ये देख हम, हो गये पागल,

दुनिया को छोड़ हम तो हुए तुम्हारे,

बन बैठा में तेरा "दिलबर" जाऊं ना अब तुझे छोड़कर,

सुर में देखो सुर मिलाकर, सुनील ये गाये,

तेरी मूरत निरखी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी,

देखी तेरी ये झांकी, श्री बाबोसा अंखिया मेरी हरखी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।