ओर कहीं ना जायें

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ओर कहीं ना जायें, ओर कहीं ना जायें,

बृज़ रजधानी छोड़ कर, ओर कहीं ना जाये.....

बृज रज महिमा जिसने जानीं,

उसकी बदली जीवन कहानी,

बातों में किसी की आयें,

बृज रजधानी छोड़ कर ओर कहीं ना जायें,

ओर कहीं ना जाये.....

रज में लोटकर संत मुनिं जन, जीवन सफल बनायें,

श्याम भी मुख लपटायें,

बृज रजधानी छोड़ कर ओर कहीं ना जायें,

ओर कहीं ना जाये.....

इस बृज रज की महिमा को, पागल भी है गाये,

धसका भी धसता जाये,

बृज रजधानी छोड़ कर ओर कहीं ना जायें,

ओर कहीं ना जाये.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।