ये नैना रोवे आजा मेरी माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रूठी मेरी माँ मैं कैसे मनावाँ,

दर्द ये कैसे मैं छुपावां,

ये नैना रोवे रोवे आजा मेरी माँ,

ये नैना रोवे रोवे आजा मेरी माँ.....

उठ सी गई है सर से छाया,

तुझको खो कर है क्या पाया,

कैसी है मेरी तक़दीर, तू बन बैठी है तस्वीर,

कौन सुनावे लोरी रातें अधूरी,

दर्द ये कैसे मैं बतावां,

ये नैना रोवे रोवे आजा मेरी माँ......

जब तेरी याद आये आँखें भर आये,

देखूं ना दिखे तू मुझको बात ये सताये,

रोटी तेरे हाथों की मुझको खिला दे,

हाथ पकड़ के गले से लगा ले,

तेरे बिन रातें मेरी कटती नहीं है,

दर्द ये कैसे मैं भुलावां,

ये नैना रोवे रोवे आजा मेरी माँ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।