शुकर तेरा माँ शुकर तेरा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शुकर तेरा माँ शुकर तेरा,

शुकर तेरा माँ शुकर तेरा,

माँ शुकर तेरा मुझको अपने दरबार बुला लेती है,

जब देना हो बेटे को लाड दुलार बुला लेती है,

कभी कभी एक साल में दो दो बार बुला लेती है,

माँ शुकर तेरा मुझको अपने दरबार बुला लेती है,

शुकर तेरा माँ शुकर तेरा शुकर तेरा माँ शुकर तेरा......

तेरा संदेसा भक्त कभी कोई ला कर दे देता है,

कभी भवन से पवन का झोका आकर दे देता है,

कभी तू सपने में आकर दरबार बुला लेती है,

जब देना हो बेटे को लाड दुलार बुला लेती है,

कभी कभी एक साल में दो दो बार बुला लेती है,

माँ शुकर तेरा मुझको अपने दरबार बुला लेती है,

शुकर तेरा माँ शुकर तेरा शुकर तेरा माँ शुकर तेरा………..

तूने पकड़ कर ना छोड़ी महा माई मेरी कलाई,

इतनी बड़ी झोली ना थी जितनी रेहमत बरसाई,

फिर भरती है भरे हुए भंडार बुला लेती है दरबार बुला लेती है,

जब देना हो बेटे को लाड दुलार बुला लेती है,

कभी कभी एक साल में दो दो बार बुला लेती है,

माँ शुकर तेरा मुझको अपने दरबार बुला लेती है,

शुकर तेरा माँ शुकर तेरा शुकर तेरा माँ शुकर तेरा……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।