कालो कि काल महाकाली कलकत्ते वाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कालो कि काल महाकाली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों मंदिरों से,

मंदिरों से बहनों मंदिरों से,

कालो कि काल महाकाली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों में मंदिरों से.....

एक हाथ में खप्पर विराजे,

माँ के सिर पे मुकुट विराजे,

बड़ी सूरत डराने वाली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों मंदिरों से.....

माँ के गले में मुंडो कि माला,

माँ का रूप है बड़ा विकराला,

माँ के होठो पे खून कि लाली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों मंदिरों से.....

माँ के डरती है भूतो कि टोली,

माँ भर देंगी भक्तो कि झोली,

सब भक्त बजाओ ताली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों मंदिरों से.....

मैया भक्तो के घर पे आयी,

माँ ने सब कि है बिगड़ी है बनायीं,

माँ भक्ति के गुलशन कि वाली कलकत्ते वाली,

चली है बहनों मंदिरों से.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।