हम दीवाने महादेव के

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने xll -ll

ओ तेरी, माया ना जाने,,, बाबा,,,,

हम हैं, तेरे दीवाने रे बाबा,

तेरे दीवाने रे भोले, तेरे दीवाने,,,

हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने xll -ll

जो गंगा को सर से, है बहाते, उसके दीवाने,

जो, नाग को है गले सजाते, उसके दीवाने l

जो, मस्ती में डमरू, है बजाते, उसके दीवाने,

जो, तांडव भयंकर, है मचाते, उसके दीवाने l

ओ तेरी, माया ना जाने,,, बाबा,,,

हम हैं, तेरे दीवाने रे बाबा,

तेरे दीवाने रे भोले, तेरे दीवाने,,,

हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने xll -ll

नमामी शमीशान निर्वाण रूपं।

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेद स्वरूपम्॥

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं।

चिदाकाश माकाश वासं भजेऽहम्॥

निराकारम ओमकार मूलं तुरीयं।

गिराज्ञान गोतीत मीशं गिरीशम्।

करालं महाकाल कालं कृपालं।

गुणागार संसार पारं नतोऽहम्॥

जो राख को तन पर, है रमाते, उसके दीवाने,

जो, विष को भी है, पी जाते हम, उसके दीवाने l

जो कैलाश के, राजा कहलाते, उसके दीवाने,

जो शमशानों में, डेरा लगाते, उसके दीवाने l

ओ तेरी, माया ना जाने,,, बाबा,,,

हम हैं, तेरे दीवाने रे बाबा,

तेरे दीवाने रे भोले, तेरे दीवाने,,,

हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने xll -ll

जो बेल पत्र से, खुश हो जाते, उसके दीवाने,

जो, दीन दुखियों के, दुःख को मिटाते, उसके दीवाने l

जो मन चाहा वर, दे है जाते, उसके दीवाने,

जो औघड़ दानी, है कहलाते, उसके दीवाने l

ओ तेरी, माया ना जाने,,, बाबा,,,

हम हैं, तेरे दीवाने रे बाबा,

तेरे दीवाने रे भोले, तेरे दीवाने,,,

हम दीवाने, महादेव के, हम दीवाने xll -ll

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।