लगा दे मेरी माँ किनारे मेरा बेडा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

"लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" xll -ll

लगा दे, लगा दे, लगा दे किनारे,,,

("लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" )

तूने, लाखों को जैसे, है तारा ओ माँ ll,,,

("लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" )

ओ मेरा, तेरे सिवा न, सहारा ओ माँ,,,

("लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" )

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मुझको, संकट ने है घेरा, छाया, चारों और अँधेरा l

मेरी, मुश्किल में है जान, वैरी, हो गया कुल जहान ll

तेरे, लाडले ने तुझको, पुकारा ओ माँ,,,

("लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" )

तूने, लाखों को जैसे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

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मेरा, दिल है बड़ा घबराया, करदे, करुणा की अब छाया l

मुझ पे, आंच ज़रा जो आई, होगी, तेरी भी रुसवाई ll

*ओ ताहने, देगा जहान, तुझे सारा ओ माँ,,,

("लगा दे मेरी माँ, किनारे मेरा बेडा" )

तूने, लाखों को जैसे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।