साई है भगवान की ज्योति

पारंपरिक
हनुमान जी भजन साईं भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति,

जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात,

रात अंधेरे चाँद हो जैसे ओ,

रात अंधेरे चाँद हो जैसे सूरज हो प्रभात,

जलती है दिन रात,

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात......

कोई कहे वो राम चंद्र है कोई कहे हनुमान,

कोई कहे वो राम चंद्र है कोई कहे हनुमान,

कोई कहे वो मंगल मूरत मान सके तो मान,

मैं तो कहता मैं तो कहता,

मैं तो कहता प्रेम की ज्योति,

मैं तो कहता प्रेम की ज्योति,

अनाथों के नाथ रहते है वो साथ,

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात......

कोई कहे गोकुल के मोहन देवकी नंदन साई,

कोई कहे गोकुल के मोहन देवकी नंदन साई,

समझके शिव भक्ति सब करते जो भी समझो भाई,

मैं तो कहता मैं तो कहता,

मैं तो कहता दुःख के साथी,

मैं तो कहता दुःख के साथी,

हर पल है वो साथ रहते है दिन रात,

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात.....

कोई कहे वो अवतारी है पूजा सब है करते,

कोई कहे वो अवतारी है पूजा सब है करते,

कोई कहे वो विष्णु रुप है पल पल जपते रहते,

मैं तो कहता मैं तो कहता,

मैं तो कहता दया के सागर,

मैं तो कहता दया के सागर,

अंग हीन के हाथ रहते है वो साथ,

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात.....

कोई कहे ईश्वर है साई कोई कहे वो अल्लाह,

कोई कहे ईश्वर है साई कोई कहे वो अल्लाह,

कोई कहे वो पक्के ब्राह्मण कोई कहे वो मुल्ला,

मैं तो कहता मैं तो कहता,

मैं तो कहता सभी सत्य है,

मैं तो कहता सभी सत्य है,

यही है सच्ची बात रहते है वो साथ,

साई है मेरे बाबा है,

साई है भगवान की ज्योति जलती है दिन रात,

जलती है दिन रात.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।