तेरा चरखा बोले सतनाम

संत कबीर
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम,

9 महीना में खाली घर में मैंने चरखा करो तैयार

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

चतुर बढ़ाई के ने ऐसो मड दिया,

याके ऊपर मढ़ दियो चाम,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

20 तो यामें लगी रे पंखुड़ी,

याके रोम रोम हरिराम,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

सत्यनाम को तकुआ मंगाया,

यामैं बीच गेर दिए तार,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

चरखा कात मैंने पीदिया उतारी,

वह झटपट लइ उतार,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

लोभ मोह के गूंजे लगाए,

याए कुतर कुतर के खाएं,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

कहत कबीर सुनो भाई साधु,

यह चरखा रखो ना जाए,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

चरखा बनाया कबीर दास ने,

या की आभा से मन मिल जाए,

चरखले वाली तेरा चरखा बोले सतनाम....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।