पवनसुत अभी तक नहीं आए

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

ना जाने किसने बहकाये पवनसुत अब तक नहीं आए,

रात पल-पल बीती जाए पवनसुत अब तक नहीं आए....

माता की मतिमंद हुई है हमें दिया बनवास,

मैंने अपने भेदभाव बिन नहीं छोड़ा बनवास,

राम अपना मन समझाये पवनसुत अब तक नहीं आए,

ना जाने किसने बहकाये.....

सुनो भ्रात हृदय से लगाओ यु बोले रघुवीर,

लक्ष्मण भैया उठ कर बोलो कहां लगा तेरे तीर,

नीर नैनन में भर आए पवनसुत अब तक नहीं आए,

ना जाने किसने बहकाए.....

अवधपुरी को जाऊं वहां क्या मुख लेकर जाऊं,

पूछे माता कौशल्या उनको क्या कुछ बतलाऊं,

राम मन ही मन पछताए पवनसुत अब तक नहीं आए,

ना जाने किसने बहकाए.....

लोग कहे नारी के खातिर भैया दिया मरवाई,

रोए रोए करके बिलाप फिर इधर-उधर जाएं,

राम तुलसी धोरे आए तुलसी धोरे आए,

पवनसुत अब तक नहीं आए,

ना जाने किसने बहकाए.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।