मैंने रांधो चने को साग लंगुरिया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मैंने रांधो चने को साग लंगुरिया,

बलम रूठ गए सब्जी पर....

मेरी सास मनावे मेरा ससुर मनावे,

और मेरी मनावे बलाए लांगुरिया,

बलम रूठ गए सब्जी पर.....

मेरो जेठ मनावे मेरी जीठनी मनावे,

और मेरी मनावे बलाए लांगुरिया,

बलम रूठ गए सब्जी पर....

मेरा देवर मनावे मेरी देवरानी मनावे,

और मेरी मनावे बलाए लांगुरिया,

बलम रूठ गई सब्जी पर.....

मेरी ननद मनावे मेरो नंदोई मनावे,

और मेरी मनावे बलाए लंगुरिया,

बलम रूठ गए सब्जी पर......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।