लहू में कुव्वत

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॥ पावन पाठ ॥

तेरे लहू में वो ताकत है,

तेरे लहू में वो क़ुव्वत है,

तेरा लहू ही देता नजात,

तेरे लहू में ही सामर्थ है,

तेरे लहू में वो ताकत है,

तेरे लहू में वो क़ुव्वत है....

ज़िन्दगी पापी की लहू से बदले ,

खुशियाँ जीवन मैं आये,

येशु का वो लहू जो कीमती,

हर दिल में सुकून लाये,

तेरा लहू ही देता नजात,

तेरे लहू में ही सामर्थ है,

तेरे लहू में वो ताकत है,

तेरे लहू में वो क़ुव्वत है....

तारीफ मसीहा कदूस की,

ऊँची आवाज़ से हम गायें,

क़ुर्बान हुवे उस इब्ने खुदा को,

मुबारक कहते हम जाए,

तेरा लहू ही देता नजात,

तेरे लहू में ही सामर्थ है,

तेरे लहू में वो ताकत है,

तेरे लहू में वो क़ुव्वत है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।