भेरू देव आ जाता मेरे सामने

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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - कुछ गीत लबो पे सजते है

नाकोंडा में पार्श्व भैरव का कितना सुंदर धाम है,

मेवानगर के राजा जिनका, इस दुनिया मे नाम है,

जब दिल से इसे पुकारू मैं,

इन नयनो से निहारु मैं,

हो.. भैरव देव आ जाते मेरे सामने,

हो.. मेरा दादा आ जाते मेरे सामने......

पार्श्वनाथ की सुंदर प्रतिमा, मेरे मन को लुभाती है,

काला गोरा भैरव संग में, दीये संग ज्यो बाती है,

जब जब भी आंगिया रचाऊँ मैं,

जब दिव्य ज्योत प्रकटाऊँ मैं,

हो.. भैरव देव आ जाते मेरे सामने,

हो.. मेरा दादा आ जाते मेरे सामने......

गजब का है श्रंगार इनके, मुख पे चमके नूर है,

काला गौरा भैरव देव, हाज रा हजूर है,

भक्ति से इन्हें रिझाऊँ मैं,

प्यारा सा भजन सुनाऊँ मैं,

हो.. भैरव देव आ जाते मेरे सामने,

हो.. मेरा दादा आ जाते मेरे सामने......

तेरा ही दीदार करूँ में, जहाँ भी जाती है ये नजर,

है अनमोल ये लम्हा दिलबर, आया में दादा के दर,

दिल का हाल सुनाऊँ मैं,

चरणों में शीश झुकाऊँ मैं,

हो.. भैरव देव आ जाते मेरे सामने,

हो.. मेरा दादा आ जाते मेरे सामने......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।