जो राधा तुम कार्तिक नहाओ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कार्तिक कठिन बहार कार्तिक नहाओ जी.....

जो राधा तुम कार्तिक नहाओ,

अपनी माता से आज्ञा लियो,

अपने पिता से आज्ञा लियो,

कार्तिक नहाओ जी....

जो राधा तुम कार्तिक नहाओ,

अपनी सासु से आज्ञा ले लो,

अपने सुसरा से आज्ञा ले लो,

कार्तिक नहाओ जी.....

जो राधा तुम कार्तिक नहाओ

अपने पति से आज्ञा ले लो,

कार्तिक नहाओ जी.....

8 माह नो कार्तिक नहाओ राधा,

10 बैसाख अलोनो खाओ राधा,

कार्तिक कठिन बहार,

कार्तिक नहाओ जी....

मुलि चवेना राधा चावने जो छोड़ दो,

सूत्रों के पलका राधा सोमने जो छोड़ दो,

धरती से हेत लगाओ,

कार्तिक नहाओ जी....

30 दिना के राधा तीस लड्डू,

तीस बताशे देयो,

कार्तिक नहाओ जी....

दूध दही से पथवारी सीचो राधा,

तुलसी में दीप जलाओ,

कार्तिक नहाओ जी....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।