जींद तेरे चरना विच लावा

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॥ पावन पाठ ॥

वे मैं सदके ललारीया जावा, चुनी नु रंग देन वालिया,

जींद तेरे चरना विच लावा, चुनी नु रंग देन वालिया.....

जिन्हा राहा मेरा आया ललारी,

उन्हा राहा तो मैं सदके वारी,

वे मैं रस्ते च पलका बिछावा, चुनी नु रंग देन वालिया,

वे मैं सदके ललारीया जावा....

एह ललारी मेरा सब तो निराला,

ज्ञान दा रंग चढ़ावन वाला,

वे मैं तन मन अपना रंगावा, चुनी नु रंग देन वालिया,

वे मैं सदके ललारीया जावा....

ऐसी चुनी मेरे हरि ने रंगाई,

तार तार विच होयी रोशनाई,

वे मैं रिझा दे नाल हटावा, चुनी नु रंग देन वालिया,

वे मैं सदके ललारीया जावा....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।