नहीं आए सांवरिया बेदर्दी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी, मेरे दिल का खिलौना तोड़ गए....

आप जो रथ में चले गए बैठके वो परदेस,

मैं पापन फिरती रही धर जोगन का भेष,

मोहे जोगन बनाकर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

आप द्वारिका राजा बन गए रुक्मण बन गई रानी,

मैं पापन ऐसी भई मैं दासी बनी ना रानी,

मोहे दुल्हन बनाकर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

रहिमन धागा प्रेम का बांधे से जुड़ जाए,

टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े गांठ पड़ जाए,

गठबंधन लगाकर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

जो मैं ऐसा जानती प्रीत करे दुख होय,

नगर ढिंढोरा पीटती प्रीत न करियो कोई,

मोहे प्रेमी बनाकर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

कागा चुन चुन खाइयो चुन चुन खाइयो मांस,

दो नैना मोहे दीजिए श्याम मिलन की आस,

मोहे आशिक बना कर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

लकड़ी जल कोयला भई कोयला जल भई राख,

मैं पापन ऐसी भई मैं कोयला बनी ना राख,

मोहे जलती चिता पर छोड़ गए,

नहीं आए सांवरिया बेदर्दी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।