रेल गाड़ी चलने वाली है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु जी काया की बन गई रेल,

रेल गाड़ी चलने वाली है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

हाथ पैर के पहिए बन गए,

दो नैनन के सिग्नल बन गए,

दिल का इंजन बना रेल गाड़ी चलने वाली है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

हाथ पैर के पहिए ठुक गए,

दो नैनन के सिग्नल बुझ गए,

दिल का इंजन फेल रेल स्टेशन ठाडी है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

लकड़ी की एक सैया बनवाई,

बाके ऊपर रेल चलाई,

कर सोलह सिंगार रेल कंधे पर जा रही है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

लकड़ी की एक चिता बनाई,

बाके ऊपर रेल सुलाई,

चलती फिरती रेल आज होली सी जल रही है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

कपड़े की एक थैली सिलवाई,

बीन बान बामें रेल गुसाईं,

नाती बेटा साथ रेल गंगा जी जा रही है,

रेल गाड़ी चलने वाली है, रेल गाड़ी चलने वाली है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।