रो रो कहे ध्रुव महाराज

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॥ पावन पाठ ॥

रो रो कहे ध्रुव से लाल मैया मैं मौसी ने मारो,

मैया मैं मौसी ने मारो मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

हम खेल रहे दोनों भैया वहां बैठी छोटी मैया,

पिता ने गोद लिए बैठार मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

मौसी ने धक्का दीनों, ना तरस पिता ने कीनों,

उत्तम गोद लिए बैठार मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

मैया हम तो वन को जामें ना लौट के घर को आमें,

वन में करें तपस्या जाए मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

मत फिकर मात की करना ना पीछे मुड़ कर देखना,

रक्षा करें हरि जी आय मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

समझाएं रही महतारी मत रोवे कुमर हजारी,

दर्शन देंगे श्री भगवान मैया मैं मौसी ने मारो,

रो रो कहे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।