फुल बरसांदी आवां दातिये

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

फुल बरसांदी आवां दातिये,

रंग बरसांदी आवां दातिये,

फुल बरसांदी.......

बाण गंगा फुल बरसांवा,

हो रज रज डुबकियाँ लावां दातिये,

फुल बरसादी....

हो चरण पादुका फुल बरसांवा,

चरणीं शीश नवामां दातिये,

फुल बरसादी....

अध क्वारी फुल बरसांवा,

हो गर्व जून लंग जावां दातिये,

फुल बरसादी......

हाथी मत्था फुल बरसांवा,

हो चढ़ के चढ़ाईयां आवां दातिये,

फुल बरसादी......

मां दे भवन ते फुल बरसांवा,

मंगियां मुरादां पावां दातिये,

फूल बरसांदी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।