मनमोहन का पावना कोई हंसी

-'' भगत रामनिवास ''
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॥ पावन पाठ ॥

मनमोहन का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ।

उस मालिक का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ॥

सरदा करके प्रेम भजन में बैठगया प्रहलाद अगन में

अग़्नि में जल जावणा कोई हंसी खेल नहीं हैं॥

उस मालिक का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं

बिलनी द्रोपती मीरा बाई इस दुनिया ने बहुत सताई

लूट पिट के न गम खावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ॥

मनमोहन का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ॥

कीर्ति कंचन और कामनी चोरी जारी जुहा जामनी

मन माया त समझावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ॥

उस मालिक का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं

''कृष्णलाल'' गुरु जी के दर्शन ''चंदरभान'' संत हुए प्रसन्न

सतगुरु का गुण गावना कोई हंसी खेल नहीं हैं ॥

उस मालिक का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं

मनमोहन का पावना कोई हंसी खेल नहीं हैं

स्वर --'' भगत रामनिवास ''

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।