मां तेरी नचाई नाचू सु

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे प्यार से बढ़के मन्ने मिली कोई सौगात नही,

मां तेरी नचाई नाचू सु दुनिया की औकात नही.....

मैंने के बेरा कित जाना मां, तेरी पैरा चालू,

तेरे हाथ में डोर मेरी मां, तेरी हलाई हालू,

तू थोड़ा ही बरसा पर ना देखी, ऐसी कोई बरसात नही,

मां तेरी नचाई नाचू सु दुनिया की औकात नही.....

मार चाहे पुचकार मन्ने पर मैं तो तेरी होली,

ओ शम्मी आ जा पर्दा हटा दे मां, खेले आंख मिचौली,

तेरे बिना ना जी सकती ओ, मेरे बस की बात नही,

मां तेरी नचाई नाचू सु दुनिया की औकात नही.....

मेरे पल्ले कुछ ना रहरा, हो ली तन की डेहरी,

राम मेहला मरजाने, इब आगे मर्जी तेरी,

तेरी चौखट पे मरजांगी, यदि मिला तेरा साथ नही,

मां तेरी नचाई नाचू सु दुनिया की औकात नही.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।