मिट्टी हो जाना है

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॥ पावन पाठ ॥

जानी कहां है चिट्ठी,

ना नाम पता मालूम,

किए जैसे करम होंगें,

ठिकाना वैसा पाना है,

बिन हरफों की इसे,

चिट्ठी हो जाना है,

जिस्म है मिट्टी का,

मिट्टी हो जाना है,

बिन हरफों की इसे,

चिट्ठी हो जाना है,

जिस्म है मिट्टी का,

मिट्टी हो जाना है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।