मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में,

मेरा संकट,मेरा संकट,मेरा संकट, हाँ हाँ हाँ,

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में।

पीछे पड़ गया भगतो मेरे एक भूत का साया,ज

हालत मेरी बिगड़न लागी समझ नहीं कुछ आने,

मेरे बस की बात नही यो ने घना सतावे,यो ने घना सतावे,

वो मेरे चिपट गया जी मै सिर मारू दीवार मे,

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में,

बबलू चाचा रोज करे डंडे से मेरी पिटाई,

डॉक्टर वैद्य दिखाता तो लागे नही दवाई,

एक जना यू बोला इसने मेहंदीपुर ले चालों,

बांध जूट ते इसने थे सूमो के अंदर घालो,थे सूमो के अंदर घालो,

मैं जाने ते नट गया जी उस बाबा के दरबार मे,

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में।

मेहंदीपुर पंहुचा तो मुझको चेन थोड़ा सा आया,

लगाया जब आरती का छींटा निर्मल हो गई काया,

भूत प्रेत सब भागे मेरे मिल गया था छुटकारा,

बालाजी ने कर दिया मेरे संकट का निपटारा,मेरे संकट का निपटारा

मने बेरा पट गया जी ना इसा कोई संसार में,

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में,

मेरा संकट,मेरा संकट,मेरा संकट, हाँ हाँ हाँ,

मेरा संकट कट गया जी बालाजी के दरबार में।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।