ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता,

तू हर पल ध्यान लगाया कर,

तेरा शुक्र दातीये कह भगता,

ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता.....

चरना दी गंगा विच, जेहड़ा डुब जाये ओह तर जाँदा ए,

नाम दे मोती मिलन ओनु, जेहड़ा इस विच गोते खांदा ए ,

जे डुब्या ऐ ते डुब्बया रह, मैनु डोबी रख एह कह भगता ,

ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता.....

जो हुँदा चंगे लई हुँदा, केहन्दे लोक सयाणे ,

की करना ए की नही करना, मेहरावाली जाणे ,

की होया एह क्यों होया, इन्ना फिकरा विच न पै भगता ,

ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता.....

दुःख सुख धुप ते छा भगतो, सदा जिंदगी नाल ही रहने ने ,

सदा नई हुंदे फायदे, घाटे वी सहने पैने ने,

तू वी दासा वांग सदा, मुँहो जय माता दी कह भगता,

ओदी रज़ा च राज़ी रह भगता.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।