॥ पावन पाठ ॥
श्यामा श्यामा कान्हा कान्हा।
जग मे निराला कान्हा कान्हा॥
जग मे निराला, नन्द जी का लाला।
मा का दुलारा श्यामा श्यामा॥
पनघट पे जाए,मुरली बजाए।
राधा का प्यारा कान्हा कान्हा॥
ध्दाराधीश वो ,भक्तो का जगदीश वो।
जग मे निराला कान्हा कान्ह॥