तेरे हाथ मेरी डोर मैं पतंग प्रभु जी

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरे हाथ मेरी डोर, मैं पतंग प्रभु जी,

जुड़े रहना हमेशा मेरे संग प्रभु जी......

आना प्रभु आना मेरे घर तुम भी आना,

दर्शन पाना मैं चरणों में गिर जाना,

मुझे मिलेगा संतों का संग प्रभु जी,

तेरे हाथ मेरी डोर, मैं पतंग प्रभु जी......

रोज मैं करूंगा दीदार दाता प्यार से,

फूलों के पिरोऊगा मैं हार दाता प्यार से,

फूलों का मैं हार,पहनाऊ गुरु जी,

तेरे हाथ मेरी डोर, मैं पतंग प्रभु जी......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।