दादा घोड़े चढ़के आजा

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॥ पावन पाठ ॥

दादा देव दादा देव जय जय श्री दादा देव,

धोले घोड़े पे चढ़के आजा दादा देव जी,

मेरा बेड़ा पार लगा जा आजा दादा देव जी,

धोले घोड़े पे चढ़के आजा दादा देव जी....

तेरे नाम का मने सहारा,

मेरा काटो संकट सारा,

सोइ तकदीर जगा जा अजा दादा देव जी,

डोले घोड़े चढ़के.....

तेरी शरण मै जो कोई आवे,

वो मन चाहा फल पावे,

भूले ने राह दिख जा आजा दादा देव जी,

डोले घोड़े चढ़के.....

कुछ और नही मने भावे,

बस तेरा नाम सुहावे,

मेरे सिर पे हाथ फिर जा आजा दादा देव जी,

डोले घोड़े चढ़के.....

गुण गावे भूलन त्यागी,

तेरा हरीश मगन अनुरागी,

मेरे मन की आश परा जा आजा दादा देव जी,

डोले घोड़े चढ़के......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।