मेरा मेरा खाली हुआ शरीर सतगुरु ज्ञान के बिना

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरा खाली हुआ शरीर सतगुरु ज्ञान के बिना,

सतगुरु ज्ञान के बिना गुरुवर ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर.....

मेरे ससुर के बाग बहुत हैं,

अब ना आए फल और फूल, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर.....

मेरे ससुर के कुआं बहुत हैं,

अब ना आए इनमें नीर, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर....

मेरे ससुर के महल बहुत हैं,

अब ना खेले इनमें लाल, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर......

मेरे ससुर के माई रे बाप हैं,

अब ना दावे इनके पैर, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर......

मेरे ससुर के कन्या बहुत हैं,

अब ना किने कन्यादान, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर.....

मेरे ससुर के गाय बहुत हैं,

अब ना किने गाय के दान, सतगुरु ज्ञान के बिना,

अब मेरा खाली हुआ शरीर.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।