बंसी के बजाने वाले प्रभु

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बंसी के बजाने वाले प्रभु कभी दर्शन दिखाओ तो मैं जानू-२

त्रेता में आये तो क्या आए,

द्वापर में आये तो क्या आए,

सतयुग में आने वाले प्रभु ,

कलयुग में आयो तो मैं जानु ! बंसी के बजाने.....

दशरथ के आए तो क्या आए,

घर नंद के आय तो क्या आए ,

महलों में आने वाले प्रभु,

मेरी कुटीया में आयो तो मैं जानू !बंसी के बजाने......

भीलनी को तारा तो क्या तारा ,

कुब्जा को तारा तो क्या तारा ,

मीरा को तारने वाले प्रभु ,

मुझ दासी को तारो तो मैं जानु ! बंसी के बजाने ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।