मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरू बजता बीच कैलाश,

मेरे भोले जी का निवास,

मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरु बजता बीच शिवालय,

वह तो सबको देने वाले,

मेरे भोले जी का डमरू वही बचेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरु बजा रहे है महेश,

वह तो काटे सबके क्लेश,

मेरे भोले जी का डमरू वही बचेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरू बजता विश्वनाथ,

जहां भोले जी का वास,

मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरू बजता बीच जालंधर,

मेरे विष्णु जी का मंदिर,

मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरू बजता हरिद्वार,

मेरे भोले की ससुराल,

मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

डमरू बजता बीच समुंदर,

वह तो काटे सबके संकट,

मेरे भोले जी का डमरू वही बजेगा,

डमरू जहां बजेगा वहां मंगल होवेगा,

मेरे भोले जी का डमरू कहां बजेगा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।