तेरी एक ना चलेगी छोड़ दे घमंड प्यारे

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॥ पावन पाठ ॥

हाय रे तेरी एक ना चलेगी छोड़ दे घमंड प्यारे छोड़ दे,

माया के चक्कर में फस कर सारी उम्र गवाई,

तेरी मेरी करे जगत में साथ ना जाए कमाई,

माया धूल में मिलेगी छोड़ दे घमंड प्यारे छोड़ दे,

तेरी एक ना चलेगी.....

महल अटारी माल खजाना गरब करे तू पाके,

साथ ना जाए कोड़ी तेरे रह गया हाथ फैलाके,

गठरी पाप की बघेगी छोड़ दे घमंड प्यारे छोड़ दे,

तेरी एक ना चलेगी.....

भाई बंधु और कुटुंब कबीला कोई साथ ना जावे,

काल की घंटी बजे एक दिन रेल हाल छूट जावे,

डोली बांस की बनेगी छोड़ दे घमंड प्यारी छोड़ दे,

तेरी एक ना चलेगी.....

सुंदर काया देख के प्राणी फुला फुला डोले,

काया को क्या देखें रे मानुष अंदर मन को धोलें,

काया होली सी जलेगी छोड़ दे घमंड प्यारे छोड़ दे,

तेरी एक ना चलेगी....

लख चौरासी में भरमाया पड़ा पड़ा क्यों रोवे,

गुरु हमारे कहे भजन कर गहरी नदिया सोबे,

तेरी भजन से बनेगी छोड़ दे घमंड प्यारे छोड़ दे,

तेरी एक ना चलेगी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।