किसे नै मेरा काला देख्या हो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

लुगाइयों री किसे नै मेरा काला देख्या हो,

के जतन करू मैं तो ढूंढती फिरू मुरली आला देख्यां हो...

श्याम रंग मंनै लाग सै प्यारा ऐ,

उसके बिना म्हारा नहीं सै गुजारा ऐ,

वो तो गोपनिया महै आरया सै इसा चाला देख्या हो,

लुगाइयों री किसे नै मेरा काला देख्या हो....

माखन चोर कह्या ऐ करै सै हे,

ना फंदे महै फ़हया ऐ करै सै हे,

वो तो गुजरिया महै रहया ऐ करै इसा निराला देख्या हो,

लुगाइयों री किसे नै मेरा काला देख्या हो....

मोरपंख उसके धरया सिर पे सै ऐ,

बिना बुलाये ना आवै घर पै ऐ,

सारी दुनिया उसके दर पै इसा रुखाला देख्या हो,

लुगाइयों री किसे नै मेरा काला देख्या हो....

पेटवाड़ गांम सारा ही छाण्या हे,

गुगन सिंह किते लुकया गिरकाना हे,

पीताम्बर सै उसका बाणा पहरे माला देख्या हो,

लुगाइयों री किसे नै मेरा काला देख्या हो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।